गर्भावस्था (Conception Period) में शारीरिक विकास

जन्म पूर्व अवस्था जिसे हम गर्भावस्था भी कहते है। गर्भावस्था में शारीरिक विकास (Conception Period) मानव विकास ,विकास की विभिन्न अवस्थाओं से होकर गुजरता है। विकास की प्रत्येक अवस्था विकासात्मक मनोविज्ञान के अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है । इस आर्टिकल में हम गर्भवस्था और गर्भावस्था में हिने वाले शारिरिक विकास के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे l

गर्भावस्था (Conception Period) :-

प्रायः गर्भावस्था 9 माह या 280 दिन तक रहता है । इस अवस्था को गर्भधान से शिशु जन्म तक कि अवधि को मन जाता है । गर्भावस्था में विकास की गति तीव्र होती है । शरीर के सभी अंगों की आकृतियों का निर्माण इसी काल मे होता है । गर्भावस्था को तीन भागों या अवस्थाओं में विभाजित किया जा सकता है । (Conception Period)

जैसे ही महिला अंड पुरुष शुक्राणु से मिलकर निषेचित होता है त्यों ही मानव जीवन का प्रारंभ हो जाता हैl निषेचित अंड सर्वप्रथम दो कोषों में विभाजित होता है, जिसमें से प्रत्येक कोष दो कोषों में विभाजित हो जाता है और विभाजन की यह प्रतिक्रिया अत्यंत तीव्र गति से चलने लगती है इनमें से कुछ कोष प्रजनन कोष बन जाते हैं l तथा अन्य शारीरिक कोष बन जाते हैं l शारीरिक कोषों से मांसपेशियों स्नायु तथा शरीर के अन्य भागों का निर्माण होता है l निषेचन से जन्म तक के समय को जन्म पूर्व काल अथवा जन्म पूर्व विकास का काल कहा जाता है l जन्म पूर्व काल 10 चंद्रमास अथवा 9 कैलेंडर मांस अथवा 40 सप्ताह अथवा 280 दिन का होता है l (गर्भावस्था)

गर्भावस्था में शरीरिक विकास तीन चरणों में होता है :-

  • डिंब अवस्था
  • पिंड अवस्था
  • भ्रूण अवस्था

डिंबावस्था :-

डिंबा अवस्था या गर्भस्तिथि, शुक्राणु एवं डिंब के सहयोग के समय से लेकर 2 सप्ताह तक मानी जाती है l इस अवस्था में कोशिका विभाजन होता है zygote, सिंचित डिम्ब में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने लगते हैं l कोषों के भीतर खोखलापन विकसित होने लगता है l संसेचित डिम्ब, डिंबवाहिनी नलिका द्वारा गर्भाशय में आ जाता है l गर्भावस्था में शारीरिक विकास

गर्भाशय में पहुंचने पर इसका आकार हुक के समान हो जाता है l गर्भावस्था में कुछ दिनों पश्चात यह इसको सतह का आधार लेकर चिपक जाता है l यहां पर गर्भ अपना पोषण माता से प्राप्त करने लगता है l कभी-कभी डिंब वाहिनी नलिका से ही चिपक कर वृद्धि करने लगती है l ऐसे गर्भ नलिका गर्व कहते हैं l इस प्रक्रिया को आरोपण कहते हैं l (गर्भावस्था में शारीरिक विकास)

आरोपण हो जाने के पश्चात संयुक्त कौशिक परजीवी हो जाता है l तथा जन्म पूर्व का काल वह इसी अवस्था में व्यतीत करता है l

डिंबा अवस्था तीन कारणों से महत्वपूर्ण होता है :-

  • प्रथम निर्वाचित अंडा गर्भाशय में आरोपित होने से पूर्व निष्क्रिय हो सकता है
  • दूसरा आरोपण गलत स्थान पर हो सकता है
  • तीसरा आरोपण होना संभव नहीं हो सकता है

पिंडावस्था

जन्म पूर्व विकास का दूसरा कार्य व्यवस्था अथवा पिण्ड काल कहलाता है l यह अवस्था निषेचन के तीसरे सप्ताह से शुरू होकर 8 सप्ताह तक चलता है l लगभग 6 सप्ताह तक चलने वाली पिण्ड अवस्था परिवर्तन की अवस्था कहलाती है l जिसमें कोषों का समूह एक लघु मानव के रूप में विकसित हो जाता है l शरीर की लगभग समस्त मुख्य विशेषताएं बाहय तथा आंतरिक इस लघु अवधि में स्पष्ट हो जाती है l

इस काल में विकास मस्तक अधोमुखी दिशा में होता है l अतः सर्वप्रथम मस्तक क्षेत्र का विकास होता है, तथा धड़ क्षेत्र का विकास होता है और अंत में पैर क्षेत्र का विकास होता हैl कुपोषण,संवेगात्मक, सदमा अत्यधिक शारीरिक गतिशीलता, ग्रंथियों के कार्य में व्यवधान अथवा अन्य किसी कारण से गर्भाशय की दीवार से विलग हो जा सकता है l इसके परिणाम स्वरूप स्वतः गर्भपात हो जाता है l

भ्रूण अवस्था :-

यह समय गर्भ तिथि के दूसरे माह से लेकर बालक के जन्म तथा दसवें चंद्रमामास अथवा 9 कैलेंडर माह तक चल रहता है l तीसरे मास में 3.5 इंच लंबा एवं 3/4 औस का गर्भ होता है l 2 माह बाद इसकी लंबाई 10 इंच एवं भार 9-10 औस हो जाता है l आठवें महीने में इसकी लंबाई 10 इंच व भार 4 से 5 पौंड तथा जन्म के समय तक गर्भाशय भ्रूण की लंबाई 20 इंच एवं भार 7 से 7.5 पौंड हो जाता है ।

भ्रूण अवस्था चार दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है :-

  1. गर्भधान के उपरांत 5 माह तक गर्भपात की संभावना बनी रहती है l
  2. माता के गर्भ में बालक को मिल रहे वातावरण की प्रतिकूल परिस्थितियों भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकती हैं l
  3. अपरिपक्व प्रसव हो सकता है l
  4. प्रसव की सरलता तथा जटिल दर्शाते हुए जन्म पूर्व परिस्थितियों से प्रभावित होती रहती है l

गर्भावस्था में शारीरिक विकास से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न :-

प्रश्न 1:-जब महिला अंड पुरुष शुक्राणु से मिलता है तो इसे क्या कहते हैं?
उत्तर :- निषेचन

प्रश्न 2:- निषेचन से लेकर जन्म तक के समय को क्या कहते हैं?
उत्तर :- जन्म पूर्व काल अथवा जन्म पूर्व विकास का काल कहा जाता

प्रश्न 3:- समानता जन्म पूर्व काल कितने समय का होता है?
उत्तर :- 280 दिवस या 9 महीने का होता है

प्रश्न 4:- जन्म पूर्व काल को कितने अवस्था में बांटा गया है?
उत्तर :- जन्म पूर्व काल को तीन अवस्थाओं में बाटा गया है

प्रश्न 5:- जन्म पूर्व काल की अवस्थाओं के नाम लिखिए?
उत्तर :- डिंबावस्था, पिंड अवस्था तथा भ्रूण अवस्था

प्रश्न 6:- किस अवस्था में कोष लघु मानव के रूप में विकसित होता है?
उत्तर :- पिण्डावस्था अवस्था में

प्रश्न 7:- निषेचित अंडा कितने कोषों में विभाजित होता है?
उत्तर :- दो भागों में

प्रश्न 8:- डिंबा अवस्था की या गर्भ स्थिति की अवस्था कब तक मानी जाती है?
उत्तर :- निषेचन से 2 सप्ताह तक मानी जाती है

प्रश्न 9:- पिंडावस्था अथवा पिंड काल की अवस्था कब तक मानी जाती है?
उत्तर :- 3 सप्ताह से 8 सप्ताह तक

प्रश्न 10:- भ्रूण अवस्था की अवधि मानी जाती है?
उत्तत :- 2 महीने से 9 महीने तक

प्रश्न 11:-गर्भधान के उपरांत कब तक गर्भपात की संभावना बनी रहती है?
उत्तर :- 5 माह तक

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