नई शिक्षा नीति से बीपीएड, डीपीएड वालों में जगी नौकरी की उम्मीद

नई शिक्षा नीति से प्रदेश भर के 1.5 लाख से अधिक बीपीएड, बीपीएड और सीपीएड बेरोजगारों में उम्मीद जगी है l

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार अब खेल, कला, संगीत, शिल्प, योगा और सामुदायिक सेवा जैसे सभी विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा l इन्हें सहायक पाठ्यक्रम या अतिरिक्त पाठ्यक्रम की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा l

इससे शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगारों को लग रहा है कि कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में उनकी नियुक्ति का रास्ता खुलेगा l वर्तमान में केवल 100 से अधिक छात्र संख्या वाले परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षा विषय के अनुदेशक नियुक्त होते हैं l 100 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में भी शारीरिक शिक्षा विषय के 32022 अनुदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया 19 दिसंबर 2016 को शुरू हुई थी, जो कि कानूनी विवाद में उलझने के कारण अब तक पूरी नहीं हो सकी है l

इस भर्ती के लिए लगभग 1.5 लाख डीपीएस डीपीएस और सीपीएड अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था l यह बेरोजगार निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सहायक शिक्षकों को नियुक्ति के लिए 6 साल से आवेदन कर रहे हैं l

बीपीएड संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष पंकज यादव का कहना है कि 1 सितंबर 2015 को विधानसभा के सामने प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज में कई बेरोजगार घायल हुए थे l प्रदर्शन कर रहे थे 101 अभ्यर्थियों को 39 दिन जेल की सजा काटनी पड़ी l लेकिन आज तक हम ₹7 प्रतिमाह मानदेय पर अंशकालीन अनुदेशक की नौकरी नहीं पा सकते हैं l

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