69000 शिक्षक भर्ती उत्तरकुंजी प्रकरण सुप्रीम कोर्ट

69000 to the point

उत्तर कुंजी मामले में 6 जुलाई के बजाय 3 जुलाई को सुनवाई होने वाली है ।

किस बेंच में सुनवाई होगी यह अभी तय नही है जब तय होगा तब जानकारी दे दी जाएगी ।

कुछ लोग कहेंगे जब आंसर की मामले मे पहले ही सुनवाई हो रही है तो कट ऑफ मामले में पहले क्यों नही

आंसर की मामले में पहले सुनवाई कराना कोई बड़ी बात नही है कई लोग जुड़े है किसी ने अर्जेंसी लगा दी होगी मामला 3 को लिस्ट हो गया है ।

कट ऑफ मामले की सुनवाई भी पहले कराई जा सकती है लेकिन सरकार को कोई जल्दी नही है ।

जिस दिन सुनवाई की डेट लगती है उस दिन जब सरकार की ओर से कोई जाता ही नही है । ऐसे में जब फेल लोगो के लिए सीट रिज़र्व हो गया तो यह उम्मीद करना कि सरकार पहले डेट लगवा देगी खुद से बेईमानी है ।

मॉडिफिकेशन पर भी बहस तभी होगी तब तीनो जज यू यू ललित जी, शान्तनुगौडर जी, विनीत शरण जी एक साथ बैठे

एक साथ अगर नही बैठेंगे तो बहस नही होगी ।(इसका मतलब यह भी नही कि भविष्य में कभी एक साथ बैठे ही नही तो सुना ही नही जाएगा केस)

कट ऑफ मामले में अगर सिर्फ पहली सुनवाई करवानी होती तो किसी भी बेंच में मामला लग जाता कोई दिक्कत नही होती लेकिन अब तीन जज ने फैसला दे दिया है इसलिए अब अर्जेंसी लगाकर दूसरे बेंच में सुनवाई संभव नही है ।

6 जुलाई तक सरकार को कोर्ट में शिक्षामित्रो का डाटा रखना था । अगर तीनो जज साहब एक साथ बैठते है तो सरकार के पास मॉडिफिकेशन पर बात रखने का चांस मिल जाएगा । फिलहाल उम्मीद 14 को रखिये इस सरकार से

अन्यथा की स्थिति में 14 की डेट लग ही गयी है । 14 को पूरे मामले की मेरिट पर बहस होगा । प्रथम दृष्टया डबल बेंच के आदेश पर शिक्षामित्र स्टे लेने की कोशिश मे होंगे । और फिर से एक लंबी बहस के चक्कर मे पड़ेंगे ।

सरकार का प्रयास पहले मोडिफिकेशन पर बहस करने का होगा । सरकार 51 हजार रिक्तियों को दिखाकर भर्ती पूरा करना चाहेगी । शिक्षामित्र जमकर विरोध करेंगे ।

बीएड और बीटीसी के वकील भी मोडिफिकेशन पर बहस करवाकर सरकार को 69000 पदों के सापेक्ष भर्ती करवाने की पैरवी करेंगे ।

अगर कोर्ट पूरे केस की मेरिट में गयी तो लंबी बहस देखने को मिल सकती है । 14 को दो तीन घण्टे अच्छे से अगर कोर्ट ने दे दिया केस को तो सरकार को राहत मिल सकती है ।

अन्यथा की स्थिति में सिर्फ मोडिफिकेशन पर छूट दे सकती है और अगली तारीख लगा दे ।

अगर यह भी नही हुआ तो सबका दुर्भाग्य समझा जाएगा कुछ महीनों के लिए केस फिर सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा ।

70 प्रतिशत केस सरकार की पैरवी पर निर्भर करता है । और मन से प्रयास हुआ तो जुलाई अंत तक नियुक्ति हो चुकी होगी ।

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