PARYAVARN ADHYYAN CTET Notes NCERT

PARYAVARN ADHYYAN CTET

NCERT EVS For CTET ( पर्यावरण अध्ययन for CTET )

‘ लिंग-हू-फेन ‘ हांगकांग का एक पकवान है जो सांप के मांस से बनाया जाता है l

CTET NOETS

टेपिकोवा ‘ केरल में जमीन के नीच उगाया जाता हैं

लूई ब्रैल फ्रांस के निवासी थे उन्होंने ब्रेल लिपि की खोज की थी l ब्रेल लिपि 6 (डॉट ) बिंदुओं पर आधारित है l

असम में बहुत बारिश के कारण घर जमीन से 10 से 12 फीट ऊंची बने होते हैं l इन्हें बांस के खंभों पर बनाया जाता है l

मनाली में पत्थर तथा लकड़ी के घर बने होते हैं l

राजस्थान में मिट्टी के घर होते हैं l दीवार मोटी और छत कटीली झाड़ियों से बनी होती है l

जम्मू कश्मीर में चाय को ‘ कहवा ‘ बोलते हैं इसमें बादाम आदि डाला जाता है l

‘ वल्लम ‘ लकड़ी से बनी छोटी नाव को कहते हैं या केरल में चलती है l

एक हाथी दिन में 100 किलोग्राम से ज्यादा पत्ती और झाड़ियां खा लेता है l

हाथियों के झुंड में केवल हथेनियां होती है l एक झुण्ड में 10 से 12 हाथनिया और उनके छोटे बच्चे होते हैं l

हाथी दिन भर में केवल 2 से 4 घंटा ही सोता है l (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

10 से 15 साल तक ही हाथी झुंड में रहते हैं फिर वह झुंड छोड़ देते हैं और अकेले रहने लगते हैं l

खेजड़ी के पेड़ राजस्थान के जोधपुर के खेजड़ली गांव में मिलते हैं l

यहां के लोग बिश्नोई कहलाते हैं l यहां शिकार व पेड़ काटना निषेध है l

खेजड़ी का पेड़ यह रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाता है l इसे ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती, इसकी छाल से दवाई आदि बनाई जाती है l

खेजड़ी पेड़ की लकड़ी को कीड़ा भी नहीं लगता इसलिए इसकी लकड़ी का प्रयोग फर्नीचर आदि बनाने में किया जाता है l

खेजड़ी पेड़ की फलियों की सब्जी बनाई जाती है l

सभी चीटियों को काम बटा होता है l रानी चीटियां अंडे देती है, और सिपाही चीटियां बिल का ध्यान रखती है l

मजदूर चींटी बिल तक भोजन ढूंढ कर लाती है l

मधुमक्खियां, दीमक और ततैया भी इसी तरह समूह में कार्य करते हैं l

अक्टूबर से दिसंबर तक का समय मधुमक्खियों के अंडे देने का होता है अतः यह समय मधुमक्खी के पालन के लिए उचित समय माना जाता है l

गोवा से केरल के रेल रास्ते में 92 सुरंग और 2000 पुल पड़ते हैं l

मलयालम में ‘ वालीयम्मा ‘ मां की बड़ी बहन को और ‘ अम्मूमा ‘ नानी को कहते हैं lPARYAVARN ADHYYAN CTET

गांधीधाम अहमदाबाद में और वलसाड गुजरात में तथा कोझीकड केरल में स्थित है

कर्णम मल्लेश्वरी एक वेटलिफ्टर है l यह आंध्र प्रदेश की रहने वाली है l यह 130 किलोग्राम वजन उठाती है l और भारत के बाहर 29 मेडल जीत चुकी है l

उत्तर प्रदेश में, कचनार के फूलों से, केरल में केले के फूलों से और महाराष्ट्र में सहजन के फूलों से सब्जी बनाई जाती है l

गुलदावरी और जीनिया के फूलों से रंग बनते हैं जिससे कपड़े रंगे जाते हैं l

बिहार में मधुबनी नाम का एक जिला है l वहां पर त्योहारों के दिन घर की दीवारों पर चित्र बनाए जाते हैं l यह चित्र पिसे हुए चावल में रंग घोलकर बनाए जाते हैं l (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

उत्तर प्रदेश का कन्नौज जिला इत्र के लिए मशहूर हैl

मिट्टी में गोबर मिलाकर जमीन पर लिपाई करने से मिट्टी में कीड़ा नहीं लगता l तथा कीट पतंग दूर रहते हैं l

नीम और कीकर की लकड़ी ऊपर दीमक नहीं लगते तथा इनका प्रयोग फर्नीचर आदि बनाने में किया जाता है l

गाजीखान यह स्थान पाकिस्तान में स्थित है l सोहना गांव हरियाणा में स्थित है, जबकि ‘ वेलबनी’का गांव कर्नाटक में स्थित है l

विजू भाई बधेका एक लेखक है, जो कि गुजरात से संबंधित है l वह बच्चों की स्तर की मजेदार कहानियां वह पत्र लिखते थे l

कल चिड़ी ( इंडियन रोबिन ) पत्थरों के बीच घोंसला बनाती है l घोसला घास से बना होता है l और इसके ऊपर पौधों की नाजुक टहनी, जड़े, उन और बाल रहता है l

कौवा के घोसले में लोहे की तार और लकड़ी की शाखाएं जैसी चीज पाई जाती है l

कोयल अपना घोंसला नहीं बनाती है कव्वे की घोसले में अंडा देती है l

‘ फाख्ता ‘ कैक्टस के काटो के बेच या मेंहदी की मेढ़ में घोंसला बनती हैं l

गौरय्या कहीं भी घोंसला बना लेती हैं अलमारी के ऊपर, आईने के पीछे आदि l कबूतर भी ऐसे ही अपना घोंसला बनाते हैं l

बसंत गौरी पेड़ के तने में छेद बनाकर उसमे अंडे रखती हैं l (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

दर्जिन चिड़िया, अपनी नुकीले चोंच से पत्तों को सी लेती है l और उसके बीच की बनी थैली को अंडे देने के लिए तैयारी करती हैं l

शक़्कर खोरा किसी छोटे पेड़ या झाी की डाली पर अपना लटकता घोंसला बनाते हैं l

घोंसला बाल, रुई, पेड़ की छाल, कपड़ो के टुकड़ो आदि से बना होता हैं l

‘ वीवर ‘ पक्षिओ मे सभी नर वीवर अपने अपने घोसले बनाते हैं l मादा वीवर उन सभी घोसलो को देखती हैं, उनमे से जो अच्छा लगता हैं l उसमे ही वह अंडे देती हैं l

गाय के आगे के दाँत छोटे होते हैं, पत्ते को काटने के लिए, घास चबाने के लिए पीछे के दाँत चपटे होते हैं l

बिल्ली के दाँत नुकीले होते हैं, जो मांस फाड़ने ke kaam आते हैं l

सांप के दांत होते तो नुकीले हैं, पर वह अपने शिकार को चबाता नहीं हैं, बल्कि निगल जाता हैं l

गिलहरी के दाँत हमेशा बढ़ते रहते हैं, दांतो से काटना और कुतरने के कारण उनके दाँत घिसते रहते हैं l

नल्लमडा, आंध्रप्रदेश में हैं l बाजार गांव, महाराष्ट्र में हैं l

कफ परेड, मुंबई मे एक जगह का नाम हैं

ऑस्ट्रेलिया में एक पेड़ पाया जाता हैं, ‘ रेगिस्तानी – ओक ‘ यह बहुत लम्बा होता हैं और इसके तने के अंदर पानी रहता हैं l

बिहू, यह त्योहार, असम me चावल की फसल कटने पर मनाया जाता हैं l

इस त्योहार पर बिहू नृत्य भी होता हैं l

बोरा और चेवा चावल के दो प्रकार है जो असम में खाया जाता है l

‘ मुक्तापुर ‘ गांव आंध्र प्रदेश के पोचमपल्ली जिले में स्थित हैं l

पोचमपल्ली जिले में ज्यादातर परिवार बुनकर है l इस बुराई को पोचमपल्ली नाम से भी जाना जाता है l

मलयालम में ‘चिटप्पन ‘ चाचा को और ‘ कुजन्म्मा ‘ चाची को कहते हैं l

अबू धाबी में रुपए को दिरहम बोलते हैंl (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

चीटियां सूंघकर एक दूसरे के पीछे चलती है l मच्छर हमारे पैरों के तलवे की गंध और हमारे शरीर की गर्मी से हमें ढूंढ लेते हैं l

सांप के बाहरी कान नहीं होते जमीन पर हुए कंपन को वह महसूस कर पाते हैं l

टाइगर अंधेरे में हम से 6 गुना बेहतर देख सकता है l टाइगर कि मूछेहवा में हुए कंपन को भाप लेती है l

टाइगर का गुर्राना ( Roaring ) 3 किलोमीटर दूर तक भी सुना जा सकता है l

जानवर हर चीज को सफेद और काली ही देख पाते हैं l

‘ स्लॉथ ‘:- यह भालू जैसा दिखता है l यह दिन में करीब 17 घंटे पेड़ों से उल्टा लटक कर सोता है l

स्लॉथ जिस पेड़ पर रहते हैं उसी पेड़ के पत्ते खाकर जीवन व्यापन करते हैं l

जब वे अपने पेड़ क सभी पत्ते खा लेते हैं तब वे पास के दूसरे पेड़ पर जाते हैं l

स्लॉथ अपनी पूरी जिंदगी (जो कि 40 वर्ष की होती है ) मुश्किल से 8 पेड़ों पर ही घूम पाते हैं lPARYAVARN ADHYYAN CTET

उत्तराखंड का जिम कार्बेट नेशनल पार्क और राजस्थान के भरतपुर जिले में घना पक्षी विहार इन जगहों पर शिकार करना वर्जित है l

सपेरों की जाति को कालबेलिया कहा जाता है l

नाग गुंफन यह रंगोली दीवारों को सजाने के लिए सौराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में प्रयोग की जाती है l

हमारे देश में पाए जाने वाले सांपो में केवल चार प्रकार के ही सांप जहरीले होते हैं :- नाग, करैत , दुबोइया तथा अफई आदि PARYAVARN ADHYYAN CTET

सांप जब काटता है तो दो खोखले जहर वाले दांतो से उस व्यक्ति के शरीर में जहर चला जाता है l उस व्यक्ति को तुरंत जहर के असर को कम करने वाली दवाई ( यानी सीरम ) दी जाती है l यह दवाई (सिरम) सांप के जहर से ही बनाई जाती है l

‘ नेपेंथिस ‘ यह पौधा ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और भारत के मेघालय राज्य में पाया जाता है l यह पौधा कीड़े मकोड़े और छोटे जीवो को शिकार करता है ताकि अपनी नाइट्रोजन की आवश्यकता को पूरा कर सकें l

स्विट्जरलैंड के जॉर्ज मैस्टर्ल ने 1948 में वेल्क्रो बनाया था l

मैस्टर्ल का प्रयोग जूतों व सैंडल पर चिपकाने हेतु किया जाता है l

मिर्ची को पुर्तगाल देश के व्यापारी दक्षिण अमेरिका से भारत लाए थे l

भिंडी अफ्रीका से तथा यूरोप से गोभी और मटर, तथा चीन से सोयाबीन लाई गई थी l

अल बिरूनी उज्बेकिस्तान से भारत आया था l PARYAVARN ADHYYAN CTET

घडसीसर यह तालाब जैसलमेर के राजा ( घड़सी ) जी ने बनवाया था l

मृत सागर ( DEATH SEA) दुनिया का सबसे नमकीन सागर है l लगभग 1 लीटर पानी में 300 ग्राम नमक पाया जाता है l

सिनकोना पेड़ की छाल से मलेरिया की दवाई बनाई जाती है l पहले तो लोग छाल को उबाल कर इस्तेमाल करते थे l

एनीमिया यह रोग हीमोग्लोबिन या आयरन की कमी से होता है l इस रोग के उपचार हेतु गुड़, आंवला और हरी पत्तेदार सब्जियां जरूर खाना चाहिए l

रोनाल्डो रोश ने बताया कि मलेरिया मच्छर से फैलता है l यह भारतीय मूल के वैज्ञानिक थे l

मिजोरम राज्य में ( यह भारत का उत्तर पूर्वी राज्य है ) में मिज़ो भाषा बोली जाती है l

बछेंद्री पाल पहली भारतीय महिला थी, जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ी थी l संसार की पांचवी महिला बन गई थी जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ी थी l माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर है l माउंट एवरेस्ट विश्व की सबसे ऊंची चोटी है जो कि हिमालय नेपाल में स्थित है नेपाल में इसे सागर माथा के नाम से जाना जाता हैं l

बछेंद्री पाल ने 23 मई 1984 को 1:07 पर माउंट एवरेस्ट पर पर चढ़कर यह कीर्तिमान हासिल किया थाl

गोलकुंडा के किले में सन 1518 से 1687 तक यहां कुतुब शाही सुल्तानों ने एक के बाद एक राज किया थाl

‘ हाउ वी फाउंड द अर्थ इज राउंड ‘ यह पुस्तक लोंगमैन लिखी है l इस पुस्तक में बताया गया है कि सदियों से अलग-अलग संस्कृतियों में इंसानों ने पृथ्वी के बारे में क्या क्या सोचा है l

नील आर्मस्ट्रांग चांद पर उतरने वाले पहले व्यक्ति थे वह चांद पर 1969 में गए थे

‘ लिंग-हू-फेन ‘ हांगकांग का एक पकवान है जो सांप के मांस से बनाया जाता है

‘ टेपिकोवा ‘ केरल में जमीन के नीच उगाया जाता हैं

लूई ब्रैल फ्रांस के निवासी थे उन्होंने ब्रेल लिपि की खोज की थी l ब्रेल लिपि 6 (डॉट ) बिंदुओं पर आधारित है

असम में बहुत बारिश के कारण घर जमीन से 10 से 12 फीट ऊंची बने होते हैं l इन्हें बांस के खंभों पर बनाया जाता है l

मनाली में पत्थर तथा लकड़ी के घर बने होते हैं l

राजस्थान में मिट्टी के घर होते हैं l दीवार मोटी और छत कटीली झाड़ियों से बनी होती है l

जम्मू कश्मीर में चाय को ‘ कहवा ‘ बोलते हैं इसमें बादाम आदि डाला जाता है l

‘ वल्लम ‘ लकड़ी से बनी छोटी नाव को कहते हैं या केरल में चलती है l

एक हाथी दिन में 100 किलोग्राम से ज्यादा पत्ती और झाड़ियां खा लेता है l

हाथियों के झुंड में केवल हथेनियां होती है l एक झुण्ड में 10 से 12 हाथनिया और उनके छोटे बच्चे होते हैं l

हाथी दिन भर में केवल 2 से 4 घंटा ही सोता है l

10 से 15 साल तक ही हाथी झुंड में रहते हैं फिर वह झुंड छोड़ देते हैं और अकेले रहने लगते हैं l

खेजड़ी के पेड़ राजस्थान के जोधपुर के खेजड़ली गांव में मिलते हैं l

यहां के लोग बिश्नोई कहलाते हैं l यहां शिकार व पेड़ काटना निषेध है l

खेजड़ी का पेड़ यह रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाता है l इसे ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती, इसकी छाल से दवाई आदि बनाई जाती है l

खेजड़ी पेड़ की लकड़ी को कीड़ा भी नहीं लगता इसलिए इसकी लकड़ी का प्रयोग फर्नीचर आदि बनाने में किया जाता है l

खेजड़ी पेड़ की फलियों की सब्जी बनाई जाती है l

सभी चीटियों को काम बटा होता है l रानी चीटियां अंडे देती है, और सिपाही चीटियां बिल का ध्यान रखती है l

मजदूर चींटी बिल तक भोजन ढूंढ कर लाती है l

मधुमक्खियां, दीमक और ततैया भी इसी तरह समूह में कार्य करते हैं l

अक्टूबर से दिसंबर तक का समय मधुमक्खियों के अंडे देने का होता है अतः यह समय मधुमक्खी के पालन के लिए उचित समय माना जाता है l

गोवा से केरल के रेल रास्ते में 92 सुरंग और 2000 पुल पड़ते हैं l

मलयालम में ‘ वालीयम्मा ‘ मां की बड़ी बहन को और ‘ अम्मूमा ‘ नानी को कहते हैं l

गांधीधाम अहमदाबाद में और वलसाड गुजरात में तथा कोझीकड केरल में स्थित है

कर्णम मल्लेश्वरी एक वेटलिफ्टर है l यह आंध्र प्रदेश की रहने वाली है l यह 130 किलोग्राम वजन उठाती है l और भारत के बाहर 29 मेडल जीत चुकी है l

उत्तर प्रदेश में, कचनार के फूलों से, केरल में केले के फूलों से और महाराष्ट्र में सहजन के फूलों से सब्जी बनाई जाती है l

गुलदावरी और जीनिया के फूलों से रंग बनते हैं जिससे कपड़े रंगे जाते हैं l

बिहार में मधुबनी नाम का एक जिला है l वहां पर त्योहारों के दिन घर की दीवारों पर चित्र बनाए जाते हैं l यह चित्र पिसे हुए चावल में रंग घोलकर बनाए जाते हैं l

उत्तर प्रदेश का कन्नौज जिला इत्र के लिए मशहूर हैl

मिट्टी में गोबर मिलाकर जमीन पर लिपाई करने से मिट्टी में कीड़ा नहीं लगता l तथा कीट पतंग दूर रहते हैं l

नीम और कीकर की लकड़ी ऊपर दीमक नहीं लगते तथा इनका प्रयोग फर्नीचर आदि बनाने में किया जाता है l

गाजीखान यह स्थान पाकिस्तान में स्थित है l सोहना गांव हरियाणा में स्थित है, जबकि ‘ वेलबनी’का गांव कर्नाटक में स्थित है l

विजू भाई बधेका एक लेखक है, जो कि गुजरात से संबंधित है l वह बच्चों की स्तर की मजेदार कहानियां वह पत्र लिखते थे l

कल चिड़ी ( इंडियन रोबिन ) पत्थरों के बीच घोंसला बनाती है l घोसला घास से बना होता है l और इसके ऊपर पौधों की नाजुक टहनी, जड़े, उन और बाल रहता है l

कौवा के घोसले में लोहे की तार और लकड़ी की शाखाएं जैसी चीज पाई जाती है l

कोयल अपना घोंसला नहीं बनाती है कव्वे की घोसले में अंडा देती है l

‘ फाख्ता ‘ कैक्टस के काटो के बेच या मेंहदी की मेढ़ में घोंसला बनती हैं l

गौरय्या कहीं भी घोंसला बना लेती हैं – अलमारी के ऊपर, आईने के पीछे आदि l कबूतर भी ऐसे ही अपना घोंसला बनाते हैं l

बसंत गौरी पेड़ के तने में छेद बनाकर उसमे अंडे रखती हैं l

दर्जिन चिड़िया, अपनी नुकीले चोंच से पत्तों को सी लेती he और उसके बीच की बनी थैली को अंडे देने के लिए तैयारी करती हैं l

शक़्कर खोरा किसी छोटे पेड़ या झाी की डाली पर अपना लटकता घोंसला बनाते हैं l

घोंसला बाल, रुई, पेड़ की छाल, कपड़ो के टुकड़ो आदि से बना होता हैं l

‘ वीवर ‘ पक्षिओ मे सभी नर वीवर अपने अपने घोसले बनाते हैं l मादा वीवर उन सभी घोसलो को देखती हैं, उनमे से जो अच्छा लगता हैं l उसमे ही वह अंडे देती हैं l

गाय के आगे के दाँत छोटे होते हैं, पत्ते को काटने के लिए, घास चबाने के लिए पीछे के दाँत चपटे होते हैं l

बिल्ली के दाँत नुकीले होते हैं, जो मांस फाड़ने ke kaam आते हैं l

सांप के दांत होते तो नुकीले हैं, पर वह अपने शिकार को चबाता नहीं हैं, बल्कि निगल जाता हैं l

गिलहरी के दाँत हमेशा बढ़ते रहते हैं, दांतो से काटना और कुतरने के कारण उनके दाँत घिसते रहते हैं l

नल्लमडा, आंध्रप्रदेश में हैं l बाजार गांव, महाराष्ट्र में हैं l

कफ परेड, मुंबई मे एक जगह का नाम हैं

ऑस्ट्रेलिया में एक पेड़ पाया जाता हैं, ‘ रेगिस्तानी – ओक ‘ यह बहुत लम्बा होता हैं और इसके तने के अंदर पानी रहता हैं l

बिहू, यह त्योहार, असम me चावल की फसल कटने पर मनाया जाता हैं l

इस त्योहार पर बिहू नृत्य भी होता हैं l

बोरा और चेवा चावल के दो प्रकार है जो असम में खाया जाता है l

‘ मुक्तापुर ‘ गांव आंध्र प्रदेश के पोचमपल्ली जिले में स्थित हैं l

पोचमपल्ली जिले में ज्यादातर परिवार बुनकर है l इस बुराई को पोचमपल्ली नाम से भी जाना जाता है l

मलयालम में ‘चिटप्पन ‘ चाचा को और ‘ कुजन्म्मा ‘ चाची को कहते हैं l

अबू धाबी में रुपए को दिरहम बोलते हैंl

चीटियां सूंघकर एक दूसरे के पीछे चलती है l मच्छर हमारे पैरों के तलवे की गंध और हमारे शरीर की गर्मी से हमें ढूंढ लेते हैं l

सांप के बाहरी कान नहीं होते जमीन पर हुए कंपन को वह महसूस कर पाते हैं l

टाइगर अंधेरे में हम से 6 गुना बेहतर देख सकता है l टाइगर कि मूछे हवा में हुए कंपन को भाप लेती है l

टाइगर का गुर्राना ( Roaring ) 3 किलोमीटर दूर तक भी सुना जा सकता है l

जानवर हर चीज को सफेद और काली ही देख पाते हैं l

‘ स्लॉथ ‘:- यह भालू जैसा दिखता है l यह दिन में करीब 17 घंटे पेड़ों से उल्टा लटक कर सोता है l

स्लॉथ जिस पेड़ पर रहते हैं उसी पेड़ के पत्ते खाकर जीवन व्यापन करते हैं l

जब वे अपने पेड़ क सभी पत्ते खा लेते हैं तब वे पास के दूसरे पेड़ पर जाते हैं l

स्लॉथ अपनी पूरी जिंदगी (जो कि 40 वर्ष की होती है ) मुश्किल से 8 पेड़ों पर ही घूम पाते हैं l

उत्तराखंड का जिम कार्बेट नेशनल पार्क और राजस्थान के भरतपुर जिले में घना पक्षी विहार इन जगहों पर शिकार करना वर्जित है l

सपेरों की जाति को कालबेलिया कहा जाता है l

नाग गुंफन यह रंगोली दीवारों को सजाने के लिए सौराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में प्रयोग की जाती है l

हमारे देश में पाए जाने वाले सांपो में केवल चार प्रकार के ही सांप जहरीले होते हैं :- नाग, करैत , दुबोइया तथा अफई आदि

सांप जब काटता है तो दो खोखले जहर वाले दांतो से उस व्यक्ति के शरीर में जहर चला जाता है l उस व्यक्ति को तुरंत जहर के असर को कम करने वाली दवाई ( यानी सीरम ) दी जाती है l यह दवाई (सिरम) सांप के जहर से ही बनाई जाती है l

‘ नेपेंथिस ‘ यह पौधा ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और भारत के मेघालय राज्य में पाया जाता है l यह पौधा कीड़े मकोड़े और छोटे जीवो को शिकार करता है ताकि अपनी नाइट्रोजन की आवश्यकता को पूरा कर सकें l

स्विट्जरलैंड के जॉर्ज मैस्टर्ल ने 1948 में वेल्क्रो बनाया था l

मैस्टर्ल का प्रयोग जूतों व सैंडल पर चिपकाने हेतु किया जाता है l

मिर्ची को पुर्तगाल देश के व्यापारी दक्षिण अमेरिका से भारत लाए थे l

भिंडी अफ्रीका से तथा यूरोप से गोभी और मटर, तथा चीन से सोयाबीन लाई गई थी l

अल बिरूनी उज्बेकिस्तान से भारत आया था l

घडसीसर यह तालाब जैसलमेर के राजा ( घड़सी ) जी ने बनवाया था l

मृत सागर ( DEATH SEA) दुनिया का सबसे नमकीन सागर है l लगभग 1 लीटर पानी में 300 ग्राम नमक पाया जाता है l

सिनकोना पेड़ की छाल से मलेरिया की दवाई बनाई जाती है l पहले तो लोग छाल को उबाल कर इस्तेमाल करते थे l

एनीमिया यह रोग हीमोग्लोबिन या आयरन की कमी से होता है l इस रोग के उपचार हेतु गुड़, आंवला और हरी पत्तेदार सब्जियां जरूर खाना चाहिए l

रोनाल्डो रोश ने बताया कि मलेरिया मच्छर से फैलता है l यह भारतीय मूल के वैज्ञानिक थे l

मिजोरम राज्य में ( यह भारत का उत्तर पूर्वी राज्य है ) में मिज़ो भाषा बोली जाती है l

बछेंद्री पाल पहली भारतीय महिला थी, जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ी थी l संसार की पांचवी महिला बन गई थी जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ी थी l माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर है l माउंट एवरेस्ट विश्व की सबसे ऊंची चोटी है जो कि हिमालय नेपाल में स्थित है नेपाल में इसे सागर माथा के नाम से जाना जाता हैं l

बछेंद्री पाल ने 23 मई 1984 को 1:07 पर माउंट एवरेस्ट पर पर चढ़कर यह कीर्तिमान हासिल किया थाl

गोलकुंडा के किले में सन 1518 से 1687 तक यहां कुतुब शाही सुल्तानों ने एक के बाद एक राज किया थाl

‘ हाउ वी फाउंड द अर्थ इज राउंड ‘ यह पुस्तक लोंगमैन लिखी है l इस पुस्तक में बताया गया है कि सदियों से अलग-अलग संस्कृतियों में इंसानों ने पृथ्वी के बारे में क्या क्या सोचा है l

नील आर्मस्ट्रांग चांद पर उतरने वाले पहले व्यक्ति थे वह चांद पर 1969 में गए थे l

लेह – लद्दाख में घर की निचली मंजिल पर खिड़की नहीं होती l इसलिए छत बनाने के लिए पेड़ों के मोटे तने इस्तेमाल किए जाते हैं l

एक पशमीना शाल में छह स्वेटर के बराबर गर्मी होती है यह एक पहाड़ी बकरी की खास नस्ल ( मैरिनो ) के बालों से बनाई जाती है जो लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई पर रह सकती है l एक पशमीना शॉल को बनाने में 250 घंटों का समय लगता है l (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

जमीन उपजाऊ बनती है :- जड़ों से, पत्तों से, शाखाओं के सड़ने से केंचुओ से l

केंचुए जमीन में छेद बना कर रहते हैं l जिसमें जमीन पॉली ( खोखली ) हो जाती है l (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

‘ झूम खेती ‘ एक फसल कटने के बाद जमीन को कुछ समय के लिए खाली छोड़ देते हैं उस पर खेती नहीं करते l (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

इस खाली जगह पर जो वृक्ष जैसे बांस व अन्य पौधे उग जाते हैं l उसे उखाड़ने नहीं है बल्कि उसे गिरा कर जला देते हैं यह रात खाद का काम करती है l (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

‘ चराओ नाच ‘ यह नाच मिजोरम मैं होता है यह नाच फसल कटने पर किया जाता है l (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

ऑस्ट्रिया में रहने वाले ग्रेगर मेंडल का जन्म 1882 में हुआ था l

ग्रेगर मेंडल ने अनुवांशिकी की खोज की थी मटर के पौधों में कुछ ऐसे गुण होते हैं l जैसे जोड़ियों में में आना, बीज का चिकना पान, या खुदरा होना पीला या हरा होना आदि lPARYAVARN ADHYYAN CTET)

पोलियो जीवाणु से फैलने वाला रोग है lयह जन्मजात नहीं होता l

यह आर्टिकल एनसीईआरटी कक्षा 3, 4 व 5 के पुस्तकों से बनाया गया है l यह आर्टिकल सीबीएसई द्वारा आयोजित सीटेट परीक्षा मैं महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा अतः हमें आशा है कि आप सभी को इससे लाभ जरूर होगा l और अधिक स्टडी मैटेरियल प्राप्त करने के लिए आप रेगुलर www.ctetpoint.com पर विजिट करते रहिए l  (PARYAVARN ADHYYAN CTET)

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