शिक्षण विधि तथा प्रविधियाँ

शिक्षण विधि तथा प्रविधियाँ यह टॉपिक विभिन्न शिक्षक भर्तियों में पूछा जाता है DSSSB KVS CTET UPTET आदि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण है

थ्रींग के अनुसार ” शिक्षक शिक्षण प्रविधियां द्वारा अपने छात्रों को कार्य करने के योग्य बनाता है और स्वयं यह दर्शाने में लगा रहता है कि इस कार्य को कैसे किया जाएगा साथ ही इस बात के लिए सतर्क रहता है कि वे इसे करे “

एम पी मफ़ेट ” शिक्षण प्रविधि ओ का प्रयोग शिक्षक द्वारा अध्ययन करने के लिए दिए गए निर्देश आत्मक तरीकों में होता है”

शिक्षण प्रविधियां निम्नलिखित प्रकार की होती हैं:-

  • प्रश्नोत्तर प्रविधि
  • विवरण विधि
  • व्याख्या विधि
  • वर्णन विधि
  • निरीक्षण अवलोकन प्रविधि
  • कहानी कथन प्रविधि
  • उदाहरण विधि
  • स्पष्टीकरण प्रविधि
  • वाद विवाद प्रविधि
  • खेल विधि

प्रश्नोत्तर प्रविधि:- शिक्षण कार्य की शुरुआत प्रश्न विधि से किया जाए तो उस शिक्षक अपने समस्त शिक्षण योजना को नियोजित स्वरूप दे सकता है l शिक्षण विधि तथा प्रविधियाँ
वास्तव में प्रशन प्रविधि का जन्मदाता सुकरात को कहा जाता है उन्होंने इसके 3 सोपान बताए हैं
निरीक्षण
अनुभव
परीक्षण
प्रश्न प्रविधि शिक्षक को सहज व क्रमबद्ध करती है इसके लिए कुछ बातें जानना आवश्यक है:-
प्रश्न सरल तथा स्पष्ट होने चाहिए
प्रश्न पाठ्यपुस्तक वस्तु से संबंध होने चाहिए
प्रश्न संपूर्ण कक्षा से किए जाए
प्रश्नों में क्रमबद्धता होनी चाहिए
प्रश्न पूर्व ज्ञान से जोड़ते हुए पाठ्य का विस्तार करने वाला होना चाहिए

विवरण विधि:- शिक्षण की ऐसी विधि जिसमें पाठ्यवस्तु प्रसंग घटना स्थान का सरल भाषा में कथन किया जाता है इसलिए इसे कथन विधि भी कहते हैं इसमें अज्ञात से ज्ञात की स्थिति की ओर अग्रसर हुआ जाता है

वर्णन विधि शिक्षण की इस प्रवृत्ति में विषय वस्तु का विस्तार से कत्ल किया जाता है ताकि छात्रों को पाठ अच्छी तरह से समझ में आ जाए इस विधि में हालांकि शिक्षा की जाति सक्रिय रहता है किंतु यदि सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो छात्र भी सक्रियता से भाग लेते हैं और संप्रेषण प्रभावी हो जाता है

वर्णन और विवरण विधि एक समान नहीं होती विवरण सत्य ही होता है वर्णन में विषय वस्तु व्यापक ढंग से प्रस्तुत की जाती है यानी वर्णन में सांगोपांग चित्रण होता है यह मौखिक लिखित दोनों तरह से किया जाता है विवरण की आगे की स्थिति वर्णन होती है इसका स्वरूप संश्लेषण आत्मक होता है शिक्षण विधि तथा प्रविधियाँ

व्याख्या विधि किसी भी विषय वस्तु का गहन ढंग से विश्लेषण करना व्याख्या कहलाता है इस विधि का प्रयोग ज्यादातर जटिल विषयों को समझाने के लिए तथा उच्च स्तर पर किया जाता है उदाहरण के तौर पर समाज को ले इसे समझा ना हो तो समाज दो शब्दों से मिलकर बना है सम +अस सम का अर्थ होता है पाठ या समीप और अस का अर्थ होता बैठना

स्पष्टीकरण प्रविधि किसी वस्तु विषय घटना को अच्छी तरह समझाना स्पष्टीकरण किया जाता है इस विधि को उद्घाटन विधि भी कहा जाता है यह विधि ज्यादातर जटिल विषयों को सरल रूप से बौधगम्य बनाने में बनाने के काम आती है

कहानी कथन प्रविधि एक राजा था एक राजकुमारी थी एक परी थी जैसे वाक्य से शुरू होने वाली कहानी हम सभी ने अपने दादा दादी से अवश्य सुनी होगी और उसमें बताई गई बातें हम सभी को याद भी होंगी यही विधि कहानी कथन विधि कहलाती है
वास्तव में बालकों को कहानी के माध्यम से सिखाएगा ज्ञान काफी समय तक याद रहता है
कहानी विधि का महत्व एकाग्रता कल्पना शक्ति का विकास अधिगम की तीव्रता में सहायक है

निरीक्षण एवं अवलोकन प्रविधि यह तथ्य पूरी तरह से स्थापित है कि देखी गई घटना वस्तु भूलती नहीं है इसका प्रभाव हमारे मस्तिष्क पर स्थाई रहता है शिक्षण करते समय यदि छात्र को पाठ्य विषय शामिल वस्तु घटनाओं के अवलोकन एवं निरीक्षण का अवसर दिया जाए तो शिक्षण अधिगम प्रक्रिया प्रभावशाली होगी वास्तव में किसी वस्तु स्थान कार्य का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करना ही अवलोकन है

उदाहरण विधि किसी कठिन और गूढ़ तथ्य, घटना वस्तु को सामग्री प्रसंगों के अनुभव के प्रयोग द्वारा व्यक्त करना उदाहरण है जैसे सरदार भगत सिंह की वीरता साहस बलिदान का उदाहरण देकर बच्चों में राष्ट्रीय भावना का विकास किया जा सकता है l शिक्षण विधि तथा प्रविधियाँ

एसके कोचर के अनुसार उदाहरण का अभिप्राय प्रतिमान चित्र तथा चार्ट आदि वस्तुओं से है जो क्लिस्ट विचारों का वर्णन करते हैं और उसकी प्रक्रिया में उन पर विशेष प्रकाश डालकर उन्हें आसान बनाते हैं यह सीखने वालों की भावनाओं कल्पनाओं को प्रेरित करता है जिससे उनके विचार स्पष्ट होते हैं और वह सही ज्ञान ग्रहण करने योग्य बनते हैं

खेल विधि खेल एक स्वाभाविक प्रक्रिया है इसी के द्वारा बालक अपने को मूल रूप से व्यक्त करता है
ह्यूजेज एंड ह्यूजेज के अनुसार ” वह विधि जो बालकों को उसी उत्साह से सीखने की क्षमता देती है जो उनमें स्वभाविक रूप से पाई जाती है कीड़ा विधि कहलाती है”

प्रयोगात्मक विधि नाम से स्पष्ट है कि जिस विधि में प्रयोग करके सिखाया जाए वह शिक्षण की प्रयोगात्मक विधि कहलाती है इस विधि का आधार वैज्ञानिकता एवं तार्किकता है प्रयोग द्वारा शिक्षण करने से छात्र सक्रिय रहते हैं और स्वयं करके सीखने का अवसर होने से अधिगम स्थाई होता है

वाद-विवाद प्रविधि महिलाओं की व्यवसाय में आवश्यकता इस विषय पर एक पक्ष है महिलाओं का व्यवसाय करना जरूरी है दूसरा पक्ष नहीं जरूरी नहीं है जब किसी विषय पर चर्चा के लिए 2 पक्ष होते हैं उनके अलग-अलग मत होते हैं तो दोनों की चर्चा के बाद निष्कर्ष निकाला जाता है इस विधि को वाद विवाद विधि कहते हैं

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